पट्टाभि सीतारमैया

0
18
Lala Lajpat Rai, Madan Mohan Malviya, Raja Ramanna, Rjakumari Amrit Kaur, Subhash Chandra Bosh, Sucheta Kriplani, Vinayak Damodar Saavarkar,Surendra Nath Banerji, Gopinath Bardoloi, Ram Prasad Bismil, Vitthal Bhai Patel, Purushottam Das Tandon, Bhulabhai Desai, V. V. Giri,
Lala Lajpat Rai, Madan Mohan Malviya, Raja Ramanna, Rjakumari Amrit Kaur, Subhash Chandra Bosh, Sucheta Kriplani, Vinayak Damodar Saavarkar,Surendra Nath Banerji, Gopinath Bardoloi, Ram Prasad Bismil, Vitthal Bhai Patel, Purushottam Das Tandon, Bhulabhai Desai, V. V. Giri,

जन्म: 24 नवम्बर, 1880, नेल्लोर तालुका, आंध्र प्रदेश

निधन: 17 दिसम्बर, 1959

कार्य: स्वतंत्रता सेनानी, लेखक व पत्रकार

पट्टाभि सीतारामैया एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, गाँधीवादी और पत्रकार थे। स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान इन्होंने दक्षिण भारत में स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रति जागरूकता फ़ैलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीतारामैया महात्मा गाँधी के प्रमुख सहयोगियों में से एक थे। सन 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में सुभाषचन्द्र बोस ने पट्टाभि सीतारामैया को पराजित किया था जो गाँधी जी के लिए बड़ा झटका था। महात्मा गाँधी इस हार से इतने विचलित हुए कि उन्होंने इस हार को अपनी हार कहा। सन 1948 के जयपुर अधिवेशन में भी सीतारामैया कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और आज़ादी के बाद वर्ष 1952 से 1957 तक वे मध्य प्रदेश राज्य के राज्यपाल रहे। राजनीति के अलावा सीतारामैया को एक लेखक के तौर पर भी जाना जाता है।

प्रारंभिक जीवन

पट्टाभि सीतारमैया का जन्म 24 नवम्बर सन् 1880 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोरे तालुका में एक साधारण गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता की आमदनी मात्र आठ रूपये/महीने थी और जब बालक सीतारामैया मात्र चार-पाँच साल के थे, तभी इनके पिता की मृत्यु हो गयी। गरीबी से जूझते परिवार के लिए यह कठिन समय था पर अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और बी.ए. की डिग्री मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से प्राप्त की। इसी दौरान उनका विवाह काकीनाड़ा के एक संभ्रांत परिवार में हो गया। तत्पश्चात उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की और आंध्र के मछलीपट्टम शहर में चिकित्स के रूप में व्यवसायिक जीवन में लग गए।

राजनैतिक जीवन

नयी शदी के आरम्भ से ही भारत में स्वाधीनता आन्दोलन ने धीरे-धीरे जोर पकड़ना शुरू किया और सीतारमैया भी इससे अछूते नही रह पाए। कॉलेज में अध्ययन के दौरान ही वो कांग्रेस के संपर्क में आ चुके थे और फिर बाद में चिकित्साकार्य छोड़कर वो स्वाधीनता संग्राम में कूद गए। सन 1910 में उन्होंने आन्ध्र जातीय कलासला स्थापित किया और सन 1908 से लेकर 1911 तक कृष्ण पत्रिका के संपादक भी रहे। अंग्रेजी और तेलुगु लेखन में उन्होंने अपनी अलग शैली विकसित कर ली थी। सन 1919 में उन्होंने जन्मभूमि नामक एक अंग्रेजी पत्र प्रारंभ किया। इस पत्र का मुख्य लक्ष्य था गाँधी के विचारों का प्रसार। इस पत्र के माध्यम से लोग उनके लेखन कला से प्रभावित हुए और मोतीलाल नेहरु ने उन्हें अपने पत्र इंडिपेंडेंट के संपादन के लिए आमंत्रित किया। इंडिपेंडेंट का प्रकाशन इलाहाबाद से होता था।

स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान डॉ सीतारमैया ने ऐसे अनेकों संस्थानों की स्थापना की जिससे राष्ट्रिय आकांक्षाओं की पूर्ती होती थी। सन 1915 में उन्होंने कृष्ण कोआपरेटिव सेंट्रल बैंक, किसानों की सहायता के लिए सन 1923 में आंध्र बैंक, आंध्र की पहली बीमा कंपनी आन्ध्र इंश्योरेंस कंपनी (1925), वदिअमोन्नदु लैंड मोर्टगेज बैंक (1927), भारत लक्ष्मी बैंक लिमिटेड (1929), और हिंदुस्तान आइडियल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (1935) की स्थापना की।

डॉ सीतारमैया महात्मा गाँधी से बहुत प्रभावित थे और गाँधी जी के आह्वान पर उन्होंने सन 1920 में असहयोग आन्दोलन के समय चिकित्सा कार्य त्याग दिया और उसके बाद स्वाधीनता संग्राम के प्रत्येक महत्वपूर्ण आंदोलन में भाग लेने के कारण सात साल जेल की सजाएँ भोगीं।

भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के अतिरिक्त डॉ सीतारमैया ने देशी राज्य प्रजापरिषद् की कार्यसमिति में वर्षों रहकर राष्ट्रीय जाग्रति लाने में बड़ा योगदान दिया।

डॉ सीतारमैया और सन 1939 का कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव

सुभाषचन्द्र बोस और महात्मा गाँधी के विचारों का मतभेद सन 1939 में चरम सीमा पर पहुँच गया जब सुभाषचन्द्र बोस ने एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए अपनी उम्मेदवारी पेश की। सुभाष सन 1938 के अधिवेशन में भी अध्यक्ष चुने गए थे। सामान्य तौर पर कांग्रेस का अध्यक्ष सर्वसम्मति से निर्वाचित होता था और सीतारमैया गांधीजी की पसंद थे। नेताजी सुभाषचंद्र बोस का मत था कि “कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव विभिन्न समस्याओं और कार्यक्रमों के आधार पर ही लड़ा जाना चाहिए”। सुभाषचन्द्र बोस जनवरी, 1939 में सीतारामैया के 1,377 के मुकाबले 1,580 मत पाकर अध्यक्ष पद का चुनाव जीत गए। सीतारामैया की हार पर गाँधीजी ने कहा, “सीतारामैया की हार उनसे अधिक मेरी हार है”।

1952 से 1957 तक वे मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद पर भी रहे।

रचना कार्य

देश की आजादी के के बाद पट्टाभि सीतारामैया ने अपना ज्यादातर समय वे लेखन कार्य में लगाया। स्वाधीनता संग्राम के दौरान ही उन्हें एक लेखक के रूप ख्याति प्राप्त थी। अंग्रेजी भाषा पर इनका असाधारण अधिकार था पर वो राष्ट्रभाषा हिंदी के भी बड़े भक्त थे। उन्होंने सिक्सटी इयर्स ऑफ़ कांग्रेस, फेदर्स एण्ड-स्टोन्स, नेशनल एजुकेशन, इंडियन नेशनलिज्म, रिडिस्ट्रिब्यूशन ऑफ़ स्टेट्स, हिस्ट्री ऑफ़ द कांग्रेस (यह उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध पुस्तक है जिसका पहला भाग सन 1935 में और दूसरा भाग 1947 में प्रकाशित हुआ था) जैसी प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं।

निधन

सन 1958 में मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद से सेवानिवृत्त होने के बाद डॉ सीतारमैया हैदराबाद में बस गए। 17 दिसम्बर, 1959 ई. को पट्टाभि सीतारामैया का देहांत हुआ।

टाइम लाइन (जीवन घटनाक्र)

1880: 24 नवम्बर को नेल्लोर तालुका, आंध्र प्रदेश, में जन्म

1910: आन्ध्र जातीय कलासला स्थापित किया

1919: जन्मभूमि नामक अंग्रेजी पत्र प्रारंभ किया

1915: कृष्ण कोआपरेटिव सेंट्रल बैंक की स्थापना

1923: आंध्र बैंक की स्थापना

1925: आन्ध्र इंश्योरेंस कंपनी की स्थापना

1927: वदिअमोन्नदु लैंड मोर्टगेज बैंक की स्थापना

1929: भारत लक्ष्मी बैंक लिमिटेड की स्थापना

1935: हिंदुस्तान आइडियल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की स्थापना की

1939: सुभाष चन्द्र बोस ने इन्हें अध्यक्ष पद के चुनाव में हराया

1948: जयपुर अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष बने

1952-1957: मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहे

1959: 17 दिसम्बर में निधन

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here