ताजमहल

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ताजमहल अपनी बेमिसाल खूबसूरती और भव्यता की वजह से दुनिया के सात अजूबों में से एक है। ताजमहल को मोहब्बत की मिसाल माना जाता है। यह मुगल शासक शाहजहां और उनकी सबसे चहेती बेगम मुमताज महल के अटूट प्रेम की याद दिलवाता है। मुगल सम्राट शाहजहां द्धारा बनवाया गया यह मकबरा करीब 42 एकड़ जमीन में फैला हुआ है, वहीं इसके चारों तरफ से सुंदर हरे-भरे बगीचों से घिरे होने की वजह से यह बेहत खूबसूरत लगता है, वहीं दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक इस भव्य इमारत की सुंदरता को निहारने के लिए खींचे चले आते हैं। ताजमहल प्रत्येक वर्ष 20 से 40 लाख दर्शकों को आकर्षित करता है, जिसमें से 200,000 से अधिक विदेशी होते हैं। अधिकतर पर्यटक यहाँ अक्टूबर, नवंबर एवं फरवरी के महीनों में आते हैं। इस स्मारक के आसपास प्रदूषण फैलाते वाहन प्रतिबन्धित हैं। पर्यटक पार्किंग से या तो पैदल जा सकते हैं, या विद्युत चालित बस सेवा द्वारा भी जा सकते हैं। खवासपुरास को पुनर्स्थापित कर नवीन पर्यटक सूचना केन्द्र की तरह प्रयोग किया जाएगा। ताज महल के दक्षिण में स्थित एक छोटी बस्ती को ताजगंज कहते हैं। पहले इसे मुमताजगंज भी कहा जाता थ॥ यह पहले कारवां सराय एवं दैनिक आवश्यकताओं हेतु बसाया गया था। प्रशंसित पर्यटन स्थलों की सूची में ताजमहल सदा ही सर्वोच्च स्थान लेता रहा है। यह सात आश्चर्यों की सूची में भी आता रहा है। अब यह आधुनिक विश्व के सात आश्चर्यों में प्रथम स्थान पाया है। यह स्थान विश्वव्यापी मतदान से हुआ था जहाँ इसे दस करोड़ मत मिले थे।

आगरा में स्थित ताजमहल की सुंदरता को देखने दूर-दूर से सैलानी आते हैं और इसके अद्भत सौन्दर्य को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। ताजमहल, भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, जिसकी वजह से भारत में टूरिज्म को भी काफी बढ़ावा मिला है।

वहीं ताजमहल को इसके आर्कषण की वजह से विश्व धरोहर की लिस्ट में भी शामिल किया गया है। ताजमहल के निर्माण के पीछे बेहद रोचक कहानी है

ताजमहल का निर्माण कब और किसने करवाया और इसका इतिहास

मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी कुशल रणनीति के चलते 1628 ईसवी से 1658 ईसवी तक भारत पर शासन किया था। शाहजहां स्थापत्य कला और वास्तुकला का गूढ़प्रेमी था, इसलिए उसने अपने शासनकाल में कई ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण करवाया था, जिसमें से ताजमहल उनकी सबसे प्रसिद्ध इमारत है, जिसकी खूबसूरती के चर्चे पूरी दुनियाभर में हैं।

ताजमहल दुनिया की सबसे मशहूर ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। मुगल शासक शाहजहां ने अपनी सबसे चहेती बेगम मुमताज महल की मौत के बाद उनकी याद में 1632 ईसवी में इसका निर्माण काम शुरु करवाया था।

ताजमहल, मुमताज महल का एक विशाल मकबरा है, इसलिए इसे “मुमताज का मकबरा” भी कहते हैं। मुगल बादशाह शाहजहां ने अपने प्रेम को हमेशा अमर रखने के लिए ताजमहल का निर्माण करवाया था।

मुमताज महल की याद में करवाया दुनिया की इस सबसे खूबसूरत इमारत का निर्माण

खुर्रम उर्फ शाहजहां ने 1612 ईसवी में अरजुमंद बानो बेगम (मुमताज महल) से उनकी खूबसूरती से प्रेरित होकर निकाह किया था। जिसके बाद वे उनकी सबसे प्रिय और पसंदीदा बेगम बन गईं थी। मुगल बादशाह शाहजहां अपनी बेगम मुमताज महल को इस कदर प्यार करता था कि वह एक पल भी उनसे दूर नहीं रह सकता था, यहां तक की वह अपने राजनैतिक दौरे में भी उनको अपने साथ लेकर जाता था और मुमताज बेगम की सलाह से ही अपने राज-काज से जुड़े सभी फैसले लेता था और मुमताज की मुहर लगने के बाद ही शाही फरमान जारी करता था।

वहीं 1631 ईसवी में मुमताज महल जब अपनी 14वीं संतान को जन्म दे रही थीं, तभी अत्याधिक प्रसव पीड़ा की वजह से उनकी मौत हो गई थी। वहीं शाहजहां अपने प्रिय बेगम की मौत से अंदर से बिल्कुल टूट गया था, और इसके बाद वह काफी गमगीन रहने लगा था, फिर उसने अपने प्रेम को सदा अमर रखने के लिए “मुमताज का मकबरा” बनाने का फैसला लिया था,जो कि बाद में ताजमहल के नाम से मशहूर हुआ। इसलिए, इसे शाहजहां और मुमताज के बेमिसाल प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।

ताजमहल कब बना और इसके निर्माण में कितना समय लगा

मोहब्बत की मिसाल माने जाने वाले ताजमहल का निर्माण काम करीब 23 साल के लंबे समय के बाद पूरा हो सका था। सफेद संगममर से बने ताजमहल की नक्काशी और सजावट में छोटी-छोटी बारीकियों का ध्यान रखा गया है। यही वजह है निर्माण के इतने सालों बाद आज भी लोग इसकी खूबसूरती के कायल है और यह दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक है।

आपको बता दें कि मुगल बादशाह शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण 1632 ईसवी में शुरु किया था, लेकिन इसका निर्माण काम 1653 ईसवी में ही पूरा हो सका था। मुमताज के इस बेहद खास मकबरे को बनाने का काम वैसे तो 1643 ईसवी में ही पूरा कर लिया गया था, लेकिन इसके बाद वैज्ञानिक महत्व और वास्तुकला के हिसाब से इसकी संरचना को बनाने में करीब 10 साल और ज्यादा लग गए थे, इस तरह दुनिया की यह भव्य ऐतिहासिक धरोहर 1653 ईसवी में पूरी तरह बनकर तैयार हुई थी।

ताजमहल को बनाने में हिन्दू, इस्लामिक, मुगल समेत कई भारतीय वास्तुकला का समावेश किया गया है। उत्तरप्रदेश के आगरा में स्थित इस भव्य और शानदार इमारत को करीब 20 हजार मजदूरों ने मुगल शिल्पकार उस्ताद अहमद लाहैरी के नेतृत्व ने बनाया था। हालांकि, ताजमहल को बनाने वाले मजदूरों से संबंधित यह मिथ भी जुड़ा हुआ है कि, ताजमहल का निर्माण काम पूरा होने के बाद मुगल शासक शाहजहां ने सभी कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे। ताकि दुनिया में ताजमहल जैसी अन्य इमारत नहीं बन सके। वहीं ताजमहल के दुनिया के सबसे अलग और अद्भुत इमारत होने के पीछे एक यह भी बड़ा कारण बताया जाता है।

ताजमहल को बनाने में आयी लागत

भारत की शान माने जाने वाले ताजमहल को बनाने में मुगल सम्राट शाहजहां ने दिल खोलकर पैसा खर्च किया था, जबकि उसकी संतान औरंगजेब ने इसका काफी विरोध भी किया था। आपको बता दें कि मुमताज महल के इस भव्य मकबरे को बनाने में शाहजहां ने उस समय करीब 20 लाख रुपए की लागत खर्च की थी, जो कि आज के करीब 827 मिलियन डॉलर और 52.8 अरब रुपए है।

ताजमहल का रहस्य एवं वास्तुकला

आगरा में स्थित ताजमहल अपने आप में अनुपम और अद्भुत स्मारक है, जो कि अपनी अप्रितम वास्तुकला के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यह सफेद संगममर पत्थरों से बनी एक बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है, जो कि भारतीय, इस्लामिक, मुगल और परसी वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। ताजमहल को बनाने में प्राचीन मुगल परंपराओं समेत पार्शियन वास्तुशैली का बेहद ध्यान रखा गया था। बेमिसाल प्रेम का प्रतीक माने जाने वाला ताजमहल अपनी भव्यता, खूबसूरती और आर्कषण की वजह से दुनिया के सात अजूबों में से एक है।

मुगलकाल में बने इस ऐतिहासिक स्मारक, ताजमहल के निर्माण में बहुमूल्य एवं बेहद महंगे सफेद संगममर के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। मुगल शासकों ने अपने शासनकाल के दौरान ज्यादातर ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में लाल बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किया था, लेकिन ताजमहल के निर्माण में सफेद संगममर के पत्थरों का इस्तेमाल अपने आप में खास है, जो कि इसकी खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देते हैं।

इस बेहद सुंदर और आर्कषण इमारत के निर्माण में करीब 28 अलग-अलग तरह के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। जो कि हमेशा चमकते रहते हैं और कभी काले नहीं पड़ते। वहीं कई पत्थरों की यह भी खासियत है कि यह चांद की रौशनी में चमकते रहते हैं। वहीं शरद पूर्णिमा के दौरान पत्थरों के चमकने से ताजमहल की शोभा और भी अधिक बढ़ जाती है।

दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक ताजमहल की दीवारों पर बेहद खूबसूरत नक्काशी की गई है। इस भव्य स्मारक को बनाने में छोटे-छोटे पहलुओं को ध्यान में रखकर इसे बेहद आर्कषित और शाही डिजाइन दी गई है, इसलिए मुगल काल में बनी यह ऐतिहासिक धरोहर, प्रसिद्ध विश्व धरोहरों की सूची में शामिल है।

ताजमहल के अलग-अलग हिस्से

ताजमहल का एंट्री गेट

दुनिया के इस सबसे खूबसूरत और भव्य स्मारक ताजमहल का मुख्य प्रवेश दक्षिण द्धार से है। इस एंट्री गेट की लंबाई 151 फीट और चौड़ाई 117 फीट है। इस प्रवेश द्धार के आस-पास और बगल में कई और छोटे द्धार भी बने हुए हैं, जिनके माध्यम से यहां आने वाले सैलानी ताजमहल के मुख्य परिसर में प्रवेश करते हैं और इसके खूबसूरत नजारे का आनंद लेते हैं।

ताजमहल का मेन गेट

उत्तरप्रदेश के आगरा में स्थित मुगलकालीन वास्तुकला के इस बेजोड़ इमारत ताजमहल का मुख्य द्धार को लाल बलुआ पत्थरों से बनाया गया है। 30 मीटर ऊंचे, ताजमहल के इस मुख्य द्धार पर कुरान की पवित्र आयतें तराशी गईं हैं, जो कि इसकी सुंदरता को और अधिक बढ़ा रही हैं। इसके ऊपर एक छोटा सा गुंबद भी बना हुआ है। वहीं ताजमहल के मेन गेट की खासियत यह है कि यह अक्षर लेखन के सामान आकार का दिखाई देता है, जिसे बड़ी समझदारी और कुशलता के साथ तराशा गया है।

ताजमहल की खूबसूरती को बड़ा रहे उद्यान

दुनिया के 7 अजूबों में से एक ताजमहल की सुंदर नक्काशी और कारीगरी की वजह से यह अपने आप में अद्धितीय है,लेकिन इसकी खूबसूरती को इसके परिसर में बने हरे-भरे बगीचे और भी ज्यादा बढ़ा रहे हैं। आपको बता दें कि यहां चार सुंदर बगीचे बने हुए हैं, जो कि इसके दोनों तरफ फैले हुए हैं। वहीं यहां आने वाले सैलानी ताजमहल की खूबसूरती को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं, और इस पल को हमेशा के लिए संजोने के लिए एवं इसे और ज्यादा खास बनाने के लिए तस्वीरें भी लेते हैं।

बेगम मुमताज महल का मकबरा और कब्र

दुनिया की इस सर्वश्रेष्ठ इमारत का मुख्य आर्कषण का केन्द्र शाहजहां की प्रिय बेगम मुमताज महल का मकबरा है। इस मकबरे को बड़े-बड़े सफेद संगमरमर के पत्थरों का इस्तेमाल कर बनाया गया हैं। वहीं इस मकबरे के ऊपर पर गोल गुंबद इसके आर्कषण को और भी अधिक बढ़ रहा है। वर्गाकार आकार में बने इसे शानदार मकबरे का हर किनारा करीब 55 मीटर का है। वहीं इस इमारत का आकार अष्टकोण है। मकबरे में चार सुंदर मीनारें भी बनी हैं,जो इस भव्य इमारत की चौखट बनती हुईं प्रतीत होती हैं।

शाहजहां और मुमताज के पवित्र प्रेम का प्रतीक माने जाने वाले इस भव्य ताजमहल के अंदर बनी मुमताज बेगम की कब्र अथवा मकबरा के शीर्ष पर करीब 275 फुट ऊंची विशाल गुंबद बनी हुई है, जो कि इसके आर्कषण को और भी अधिक बढ़ाती है। इसके अलावा अन्य कई छोटी-छोटी गुंबद भी बनी हुई है। अर्धगोलाकार आकार में बने ताजमहल की सुंदरता और भव्यता को देखकर हर कोई मंत्रमुंग्ध हो जाता है और इसकी तरफ खींचा चला आता है।

ताजमहल के चारों कोने पर बनी खूबसूरत मीनारें:

मुख्य आधार के चारो कोनों पर चार विशाल मीनारें (देखें बायें) स्थित हैं। यह प्रत्येक 40 मीटर ऊँची है। यह मीनारें ताजमहल की बनावट की सममितीय प्रवृत्ति दर्शित करतीं हैं। यह मीनारें मस्जिद में अजा़न देने हेतु बनाई जाने वाली मीनारों के समान ही बनाईं गईं हैं। प्रत्येक मीनार दो-दो छज्जों द्वारा तीन समान भागों में बंटी है। मीनार के ऊपर अंतिम छज्जा है, जिस पर मुख्य इमारत के समान ही छतरी बनी हैं। इन पर वही कमलाकार आकृति एवं किरीट कलश भी हैं। इन मीनारों में एक खास बात है, यह चारों बाहर की ओर हलकी सी झुकी हुईं हैं, जिससे कि कभी गिरने की स्थिति में, यह बाहर की ओर ही गिरें, एवं मुख्य इमारत को कोई क्षति न पहुँच सके।

ताजमहल में बनी छतरियां:

गुम्बद के आकार को इसके चार किनारों पर स्थित चार छोटी गुम्बदाकारी छतरियों (देखें दायें) से और बल मिलता है। छतरियों के गुम्बद, मुख्य गुम्बद के आकार की प्रतिलिपियाँ ही हैं, केवल नाप का फर्क है। इनके स्तम्भाकार आधार, छत पर आंतरिक प्रकाश की व्यवस्था हेतु खुले हैं। संगमर्मर के ऊँचे सुसज्जित गुलदस्ते, गुम्बद की ऊँचाई को और बल देते हैं। मुख्य गुम्बद के साथ-साथ ही छतरियों एवं गुलदस्तों पर भी कमलाकार शिखर शोभा देता है। गुम्बद एवं छतरियों के शिखर पर परंपरागत फारसी एवं हिंदू वास्तु कला का प्रसिद्ध घटक एक धात्विक कलश किरीटरूप में शोभायमान है।

ताजमहल के ऊपर बना सुंदर कलश:

दुनिया की इस सबसे खूबसूरत और ऐतिहासिक धरोहर ताजमहल के शीर्ष पर बनी विशाल गुंबद पर एक कांसे के द्धारा निर्मित बेहद खूबसूरत कलश बना हुआ है। वहीं इस कलश के ऊपर चंद्रमा की खूबसूरत आकृति भी बनी हुई है, इस कलश की नुकीले नोंक और चंद्रमा की आकृति एक त्रिशूल जैसी प्रतीत होती है, जो कि हिन्दू धर्म की मान्यता के मुताबिक भगवान शिव के चिन्ह को दर्शाती हैं।

ताजमहल में लिखे गए सुंदर लेख:

ताजमहल में पाई जाने वाले सुलेखन फ्लोरिड थुलुठ लिपि के हैं। ये फारसी लिपिक अमानत खां द्वारा सृजित हैं। यह सुलेख जैस्प‍र को श्वेत संगमर्मर के फलकों में जड़ कर किया गया है। संगमर्मर के सेनोटैफ पर किया गया कार्य अतीव नाजु़क, कोमल एवं महीन है। ऊँचाई का ध्यान रखा गया है। ऊँचे फलकों पर उसी अनुपात में बडा़ लेखन किया गया है, जिससे कि नीचे से देखने पर टेढा़पन ना प्रतीत हो। पूरे क्षेत्र में कु़रान की आयतें, अलंकरण हेतु प्रयोग हुईं हैं। हाल ही में हुए शोधों से ज्ञात हुआ है, कि अमानत खाँ ने ही उन आयतों का चुनाव भी किया था।

आंतरिक प्रारुप एवं सजावट:

मुमताज महल के इस भव्य मकबरे के नीचे एक तहखाना भी है, आम तौर पर सैलानियों को यहां जाने की अनुमति नहीं है। इस कब्र के नीचे करीब 8 कोने वाले 4 अलग-अलग कक्ष है। इस कक्ष के बीचों-बीच शाहजहां और मुमताजमहल की भव्य और आर्कषित कब्रे हैं। ताजमहल के अंदर शाहजहां की कब्र बाईं तरफ बनी हुई हैं, जो कि मुमताज महल की कब्र से कुछ ऊंचाई पर है और विशालकाय गुंबद के ठीक नीचे बनी हुई है। जबकि मुमताज महल की कब्र संगमरमर की जाली के बीच में स्थित है, जिस पर बेहद खूबसूरत तरीके से पर्शियन में कुरान की आयतें लिखी हैं। इन दोनों खूबसूरत कब्रों को कीमती रत्नों से सजाया गया है और इन कब्रों के चारों तरफ संगमरमर की जालियां बनी हुईं है। वहीं इस भव्य इमारत का अंदर ध्वनि का नियंत्रण अति उत्तम है।

ताजमहल से जुड़े रोचक और दिलचस्प तथ्य

मुगलकाल में बनी ताजमहल की इमारत इकलौती ऐसी इमारत है, जिसका निर्माण सफेद संगमरमर के पत्थरो्ं से किया गया है। इस भव्य स्मारक के निर्माण में करीब 23 साल का लंबा वक्त लगा था, जिसे न सिर्फ भारतीय मजदूर बल्कि तुर्की और फारस के मजदूरों ने भी बनाया था।

आगरा में स्थित ताजमहल एक ऐसी लकड़ी के आधार पर बनाया गया है, जिसे मजबूत बनाए रखने के लिए नमी की जरूरत होती है, और इस नमी को यमुना नदी बनाकर रखती है। दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक ताजमहल जाने वाले मुख्य मार्ग के बीच जो फव्वारे लगाए गए हैं, वे किसी पाइप से नहीं जुड़े हैं, बल्कि हर फव्वारे के नीचे एक तांबे का टैंक है, यह सभी टैंक एक ही समय पर भरते हैं, और प्रेशर पड़ने पर इसमें पानी भी छोड़ते हैं।

मुगल सम्राट शाहजहां ताजमहल की तरह ही एक काला ताजमहल बनवाना चाहता था, लेकिन इससे पहले शाहजहां को उसके बेटे औंरगेजब ने बंधक बना लिया था, जिससे उसकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी।

ताजमहल को बनाने के लिए करीब 8 अलग-अलग देशों से सामान लाया गया था। और इसकी निर्माण सामग्री ढोने के लिए करीब 1500 हाथियों का सहारा लिया गया था।
औरंगाबाद में इस भव्य और ऐतिहासिक स्मारक ताजमहल का डुप्लीकेट यानि की प्रतिकृति बनी हुई है, जो कि ‘मिनी ताज’ के नाम से मशहूर है। वास्तविक में यह “बीवी का मकबरा” है।

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